सुओ-मोटो’ हो गई दाखिल खारिज की प्रक्रिया, दफ्तरों के चक्कर लगाने से छुट्टी
Jamui News: सुओ-मोटो दाखिल खारिज प्रक्रिया में उन रैयतों को अलग से आवेदन करने के लिए अंचल कार्यालय नहीं जाना होगा, जो जमीन का निबंधन कराएंगे. अब जमीन का निबंधन कराने के साथ ही खुद-ब-खुद एक आवेदन दाखिल-खारिज के लिए दर्ज हो जाएगा.
जमुई: बिहार में दाखिल खारिज की प्रक्रिया इतनी आसान नहीं थी. रैयतों को अंचल कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ते थे और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था. लेकिन अब नए नियमों के तहत दाखिल खारिज को सुओ-मोटो बना दिया गया है, जिससे यह प्रक्रिया आसान हो गई है.
जानें क्या होता है सुओ-मोटो
सुओ-मोटो एक लैटिन शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘स्वतः संज्ञान लेना’. अब रैयतों को दाखिल खारिज के लिए अलग से आवेदन नहीं करना होगा. निबंधन के बाद उनका आवेदन स्वतः अंचल अधिकारी के पास चला जाएगा और प्रक्रिया तेजी से पूरी होगी.
दाखिल खारिज की वर्तमान प्रक्रिया
वर्तमान में रैयत को जमीन निबंधन के बाद दाखिल-खारिज के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता था. अब नए नियमों के तहत यह प्रक्रिया स्वतः पूरी होगी, जिससे लोगों को राहत मिलेगी.
अब रैयतों को घर बैठे दाखिल-खारिज की सुविधा मिलेगी, जिससे समय और श्रम की बचत होगी.